Sunday, October 30, 2011

डाकिया याद आया


कब से सोच रहा हूँ की कुछ है जो याद नहीं आ रहा! आज जब एक तस्वीर देखि तो समझा की यह तो अपना डाकिया था जिसे में मिस कर रहा था. नाम भूल गया पर वो दो जन थे. एक सुबह की डाक लाते और एक दोपहर की. सर्दी गर्मी बरसात..बारहों महीने. उन्हें मालूम था की पोस्टकार्ड भी उतनी ही एहमियत रखते थे जितनी गीता प्रेस के कल्याण का अंक. लू के मरे बंद खिरकी को खोल चिट्ठी बंद कर देते, बारिश में प्लास्टिक में लपेट उन्हें गीला होने से बचाते. होली दिवाली आते एक छोटी इस बख्शीश ले जाते. बडे वाले अंकल तो बहुत ही अच्छे थे. स्कूल से हमारी शराफत का चिटठा घर पर नहीं दिया. हर बार वार्निंग दी ..इस बार पावती भेज रहा हूँ पर अगली बार घर पर सूद समेत बता दूंगा. एक भी इंटर व्यू का खत लेट नहीं हुआ. स्कूल के रिजल्ट आये..पत्रिका आती , मोनी आर्डर की पावती आती. दोपहर कभी पानी मांग लेते कभी दाल अचार..बीबी बीमार है जी सब्जी बनी नहीं रोटी लेकर आ गया, कभी हाजमे की दावा तो कभी सरदर्द की..एक अपनापण एक इंसान के लिए इंसान की कद्र. उनके बेटी ने जब बी ए में दाखिला लिया तो मार्क्स शीट सत्यापित कराने को घर आये तो बिना चाय पिलाये बाबु जी ने जाने नहीं दिया. बेटी को पढ़ा रहे हो बहुत बड़ा काम कर रहे हो..सुन कर रो पड़े थे..हम तो कुछ कर नहीं पाए साब यह बच्चे कुछ करलें. गाँव में कोई जनता भी नहीं की में पोस्ट मन हूँ..सब समझते हैं की पोस्ट मास्टर हूँ. बच्चों को किसी को बताने में शर्म आती है की उनका बाप डाकिया है. सही ही तो है..कौन डाकिया बनना चाहता है. आपने किसी को कहते सुना है बड़ा हो कर में डाकिया बनूँगा...बस अब तो इनका ही सहारा है..

अब पता नहीं कहाँ चले गए यह लोग. आते तो हैं हम नहीं जानते. हमारा डाकिया कौन है हमें नहीं मालूम. पर हम उनको आज याद करते हैं.

Wednesday, October 26, 2011

भ्रस्टाचारी और भगवान्

भ्रष्टाचारी अत्यंत दुखी था. उसने एक भी दिया नहीं जलया था. गरीबों को दान पुन्य अमीरों को गिफ्ट कुछ भी नहीं किया.न तीन पट्टी खेली न ताश पार्टी बस अपने लिए एक ओल्ड मोंक ले आया है. लक्ष्मी जी को सूचना मिली की घर बदलने का टाइम आ गया है. उल्लू ने उन्हें हालत की जानकारी दी. लक्ष्मी जी ने पुछा क्या हुआ? रेड पड़ी , पकड़ा गया, हम राजा है..नहीं तो फिर अचानक यह बैराग. यह धन का पुजारी मुझ से नाता क्यों तोड़ रहा है..पहुँच गयेएं उनके घर. वत्स ओह वत्स..क्या हुआ यह क्या हालत बना राखी है..लोग मेरा आवाहन करते हैं तुम मेरा तिरस्कार कर रहे हो क्या हुआ? भ्रष्टाचारी पैरों में गिर गया बोला हे माते! मेरी मजाल में आप से मुख मोडू पर अब तो आप के आने का मार्ग ही बंद हो गया है, कह कर उसने जनलोकपाल बिल की कॉपी दिखा दी. मंत्री जेल में हैं. अभी तक कोई और तरीका निकला नहीं है, पहले मंत्री के नाम पर हम लेते थे, उनकी बोटी उन्हें लौटा कर दो रोटी हम भी ले लेते थे, पर अब न कोई दे रहा है न कोई ले रहा है..यह अन्ना भरी पड़ गया है. नेता लोग लगे हैं बेईमानी को धर्म बनाने में पर कुछ हो नहीं रहा. मेरा अपना बेटा इस पैसे से खरीदी विदेशी गाडी में कॉलेज जाता था, सोने की पांच तोले की जंजीर गले में पहनता था, दिन के पांच दस हज़ार उदा देता था..एक महीने से घर से भर नहीं निकला. हर आदमी कहता है इसका बाप चोर है. अब ऐसे पैसे का क्या लाभ..थाने पे मिठाई भिजवाई थी, पोलिस वाले ने लौटा दी..बोला अब वो टाइम नहीं रहा , अगर रेड पड़ी तो वोह भी उनके ही साथ होगा..
लक्ष्मी जी परेशान हो गयीं, उल्लू की तरफ देख कोल्ड ड्रिंक का सिप लिया और बाएँ पिछले हाथ से पसीना पोंचा...गणपति कहाँ है? भ्रष्टाचारी बोला - माँ गया था उनके पास, लाल बाग़, पांच करोड़ से ऊपर तो चढ़ावा आया है केश! सोना, डोल्लर, हीरा अलग. सब कैमरे पर गिना जा रहा था, मशीन लगी थी, टैक्स भरा जायेगा, उनकी तो सही चल रही है...
लक्ष्मी जी प्रसन्न हो गयीं, मूर्ख मानव तो तुझे रिश्वत लेना नहीं आता, तू भी कुछ जुगाड़ कर, पैसा एक नंबर में ले उसका टैक्स दे, एक कंपनी बना, रोना बंद कर ..सुन एन जी ओ खोल ले. बाकी इन्द्र देख लेंगे..
भ्र्शताचारी घबरा गया, बोला माँ मुझे रहने दो...मेरा अपना बेटा में भी अन्ना की टोपी पहन कर घूम रहा है...आज कल बहुत सख्ती है, मिठाई नकली है , खोया असली नहीं है..आप आयी हो तो एक चोकलेट खा के मुंह मीठा तो कर ही लो...और उल्लू भाई तुम तो जान बचाओ, सुना है तुम्हरी बलि का फैशन चल निकला है...जंगल को हो लो..
सुना है लक्ष्मी जी वन बी एच के ढूंढ रही हैं महदा कालोनी में...चलो पास रहेंगी तो दिल लगा रहेगा. हैप्पी दिवाली!!!

Friday, October 21, 2011

prabhu mile they

सुबह टहलने निकला तो प्रभु मिल गए. मैंने कहा अच्छा है भगवन आप मिल गए, नहीं तो रोज़ तो कुत्तों के साथ ही टहलता था. भगवन हँसे, बोले उनको भी अधिकार है इस पृथ्वी पे रहने का . तुम मनुष्य लोग एक क्षत्र राज्य क्यों चाहते हो? अब में हंसा. प्रभु सुबह सुबह..आप तो फल कंद मूल खाते हैं , घर से भी शान्ति होगी, फिर आप टहल रहे हैं. प्रभु बोले काम बढ़ गया है, पीठ अक्कड़ गई थी सोचा मनुष्य लोक भी घूम लूँगा और जायजा भी ले लूँगा की क्या चल रहा है. सुना है प्रभु आपने भी अपना बिजनेस मॉडल बदल लिया है- मैंने हिम्मत कर के पूछ लिया. कैसे? दोनों भोंहें धनुषी बनाते उन्होंने पुछा. मैंने समझया की अब सु कर्मियों को भी दंड देते हैं, नेक लोग पीड़ित हैं , बदमाश लोग ऐश लूट रहे हैं. प्रभु मुस्कुराये अच्छा वो.. क्या है न की आबादी गयी है बढ, इतना डेटा हेंडल करना संभव नहीं है. इसलिए अगले जनम का चक्कर नहीं है अब, हाथ के हाथ निपटा रहे हैं. जैसा कर वैसा भर..हद से हद पांच से दस साल का डिले है. कल देखो गद्दाफी निपटा दिया, सूअर की तरह नाली में छुपा था..निकल घसीट कर गोली से मारा, घसीट के ले गए..जैसी करनी वैसी भरनी. यहीं बैलेंस शीट फाइल कर दी. मैं साथ साथ चलता रहा. परन्तु प्रभु मैंने तो अपने जाने में कुछ बुरा नहीं किया फिर मुझे..बात पूरी भी नैन कर पाया था उन्होंने प्यार से सर पे हाथ फेरा और बोले, ऐसा नहीं होता, सिस्टम काफी रोबस्ट है. और कुछ बेक लोग भी है..हो सकता हो तेरा पिछले जन्म का भी हो. मैं सुनता भी रहा चलता भी रहा.
प्रभु ने पुछा दुखी है क्या? मैंने अवसर न खोते बोला प्रभु एक बार में पूरी सजा दे दो. यह हर रात इतना दर्द, बर्दाश्त नहीं होता. अब हिम्मतउर टूट जाती है. आप से विश्वास उठ जाता है. एस अन हो की में आप को ही खो दूं. प्रभु मुस्कुराये और बोले दंड के दो पहलु हैं, दंड और अवधी.. , दोनों ही भुगतने होंगे. और सुनो रही मेरे ऊपर विश्वास या अविश्वास की बात तो तुम पडे लिखों के भरोसे नहीं हूँ मं. मैंने हिम्मत की और पुछा..महराज मोक्ष नहीं मिल सकता, अब और झेल नहीं प् रहा, टूट गया हूँ..साथ ही ले चलो..
देखा प्रभु खडे हो गए... नहीं वत्स यह नहीं हो सकता. कष्ट तो भोगना पड़ेगा, हाँ इतना कर सकता हूँ, थोड़ी हिम्मत दे सकता हूँ..कह कर प्रभु लुप्त हो गए...
वह रे प्रभु...

Wednesday, August 31, 2011

इस टोपी का वज़न कितना होगा

सवाल चोंका ना दे तो फिर वो कल्लन ही क्या? इफ्तार का वक्त हो चला है, घर पे मेहमान हैं, और जनाब ग़मगीन बैठे हैं। वज़ह पूछी तो उन्होंने सामने राखी टोपी सरका दी और दिलीप साहिब की तरह हमसे कहा- कितनी आसानी से पहन लेते हैं ये टोपी..गर्दन मैं कितना जोर चाहिए इसका बोझ उठाने को। दिल और दिमाग का संतुलन बिगाड़ दे सकती है टोपी..और यहाँ हर कोई लगाये घूम रहा है...मैं हूँ अन्ना। मैंने बात और माहोल को हल्का करने के इरादे से कहा कल्लन भाई ये तो समर्थन दिखा रहे हैं और क्या..आप सेरिऔस हो रहे हैं? में हूँ अन्ना पर रिकॉर्ड अत्तक गया..कमरे के चक्कर लगते रहे, टोपी को सजा के रख दिया है। अक्सर उसके सामने बैठ कार कुछ सोचते हैं...कल्लन देश के प्रति बहुत भावुक हैं...एक बार हमसे पूछ बैठे थे,,गांधी को जानते हो तुम? तब से पंगा नहीं लेता मैं.

Monday, August 1, 2011

गलत फ़हमी है मोह्त्त्रमा

हाँ नहीं तो , अब छेड़ा खानी का पहनावे या उम्र से क्या लेना देना है? यह तो पोलिस की फैलाई गंद है। अम्मा छेड़ना और छिडवाना ये तो कलाकारों का काम है। इस मैं जिनको महारत है उनमें अपने कल्लन मियाँ भी हैं। अब अमेरिका मैं यह प्रचलित नहीं है नहीं तो आस्कर से कम के दावेदार नहीं हैं। इस खेल का एक नियम है, जिसको छेड़ा जा रहा है उसको मालूम ना चले की चाल उस पे चली गयी है..बहुत मुश्किल खेल है चाचा...हमने बड़े बड़ों को पिटते देखा है। छेड़ो तो कल्लन मियाँ की तरह...सामने से नूर बेगम चली आ रहीं थीं । पहनावा ऐसा की मुजरे वाली भी सुभान अल्लाह बोल दे...अब देखिये कातिल चाल। कल्लन मियाँ ने आतिश को आवाज़ दी ...अम्मा गजरा ना मिले तो इतर ले लेना, आज मुजरा जमेगा जरुर...बाज़ार मैं शायद ही कोई हरामी होगा जिस के चहरे पे मुस्कराहट ना आ गयी हो... कातिल हैं कल्लन मिय्याँ। अजी मोहल्ले की लड़कियां शेखू बाबा की मजार पे मन्नत माँगा करती थीं की एक बार छिडवा दो कल्लन मियां से, घंटो की लिपा पोती का कोई तो कद्रदान हो। उन दिनों हम नौकरी के चक्कर मैं थे तो खबर लगी, सुलेमान की बीबी ने इफ्तार के नाम पे घर बुलवा भेजा था, पर असली वज़ह थी के बाज़ार मैं छेड़ी गयीं थी। मसला कुछ ऐसा था...की बड़ी बी दूकान पर सौदा ले रहीं थीं..कल्लन छिछोरों के साथ महबूब पान भंडार पे थे..ईद की तारिख को ले के बहस थी..इतने मैं नज़र पड गयी बड़ी बी पर , उनको भी इंतज़ार था..इनको भी खबर थी...कल्लन मियाँ ने कह दिया..बेकार की वर्जिश है ...चाँद दिखा नहीं दिखा...हमारा चाँद तो कब का निकल गया है....बस फिर क्या था...इफ्तार को न्योता आ लिया..नहीं तो पेंतालिस की उम्र कौन छिड़ता है...बुर्के मैं जाने कौन जा रही थी, बनिए से कल्लन बोले..एक लिफाफा दे दे यार, हीरा रखना है...ना दुनिया देखेगी ना चोरी होगा...बुरका पट हट लिया...
सर्दियों मं अक्सर छत पे अख़बार पढ़ा करते थे..एक दिन भाभी जान ने पक्कड़ लिया। चस्मा ले कार गए नहीं थे..परली छत पे गुलजारी लाल की बीवी और भाभी जान थे..कबूतरों का दाना लहरा के आओ आओ करने लगे...भाभी ने घर आ कार जो छिछा लेदर किया सो क्या बताएं। उस दिनन से यह रिटायर कार गयेंन है...इंसान से इंसान की ख़ुशी देखि नहीं जाती।

Tuesday, July 26, 2011

भोला भंडारी

सावन आया नहीं की हमारी मौज..भोले की फौज करती है मौज। फटफटिया निकली, हरद्वार को लग लिए, अच्छा काम पक्का हो इस लिए कल्लन को कल्लू के नाम से जाना जाता, नारंगी हाफ पेंट, बनियान, गमछा और भक्त तैयार। किसी भी कँवर भंडारे पे रूक कर दूध फल खाना और आगे बढ़ जाना। क्या दिन थे। मस्ती भरी हवा जो चली...और जैसे ही कोई भक्त आ जाये...भोले की नगरी से जो निकली.... पर जब घर मैं ही दुश्मन हो तो बाहर जाकर क्या खोजें। भर पेट दूध मलीदा मार के नाक की आवाज़ को डी जे से टक्कर लेते हम लेट गए, आँख खुली तो हमारे चारों और मण्डली थी, सामने हमारे मित्र जिनके चेहरे बता रहे थे की किया तो उन्होंने इक्क मजाक था पर अब बात उन से भी निकल गयी है। हमने इशारे से एक को बुलाया, और मामला सब समझ आ गया। हरामियों ने हांकते हांकते हमें किसी सिद्धि पीठ का अगला वारिस बता दिया है। अखंड बिभूति शिव के तांडव मन्त्र की उद्घोसना भी हो गयी...अब पिटने के सभी रास्ते लग भाग तय हो चुके थे...दोस्ती इम्तिहान लेती है..हमने चिलम निकली , एक सेवक को दी, सेवक बोला बाबा यहाँ तो इसका इंतज़ाम नहीं है...सिगरेट से काम चला लो..हमने नेत्र पलट कर हामी भरी तीन काश मैं सिगरेट साफ़...और फिर जयकारा भोले शंकर का...कहानी बंधी। भोले बाबा कैलाश पे थे, नीचे उनका भक्त रावन बार बार गला काट कर भेंट कर देता है...उधर परभू राम श्वेत्लिंग रामेश्वरम मैं आपको बुला रहे हैं...पृथ्वी काँप रही है...आकाश लाल है...फिर कुछ एक घंटा बोले हम।
पंडाल से बहर भक्त लोग जमे थे...बीच बीच मैं गायन का प्रयोग... मेरे मन बे बसे हो भोले बाबा॥ अब क्या कशी अब क्या काबा... कल्लू सब से उछाल उछाल कर गा रहा था, पिटने का सबसे जायदा डर इसको ही था। मन मैं चोर, तो रात भी भोर।
लेकिन जो भी कहिये प्रवचन शेस कर विदा मांगी॥ सब ने पूछा कैसे जाओगे , हमने कहा गंगा नंगा साधू..चले जायेंगे आप लोग सेवा ना करें॥ कल्लू ने कहा, महराज हम गजरौला तो जा ही रहे हैं...जम लो इसी पे चार फट फातिया हैं..कोई तकलीफ नहीं..यहाँ तक लाये कोई तकलीफ हुई...अब मना मत करो...बस एक दो तीन और तीस किलोमीटर एक सांस मैं निकल कर...शिव धरा को मुक्त किया, और इस से पहेले की मैं अपना रौद्र रूप धरता सारे मित्र पैर मैं लेट गए। बोले आज बचा लिया तूने , सबने कसम खाई की यह साल आखरी था...
बगल से प्रभु के सेवक जाते हैं, आँख शर्म से झुक जाती है, बस एक ही बात कहता हूँ, बच्चे आप से मज़ाक नहीं करेंगे तो और किस से करेंगे...नीलकंठ विष पी जाने वाले..माफ़ करदे बाबा... भोले की फौज ने करली थोड़ी मौज...बम बम बम बम बोल हर हर हर महा दे दे दे दे व् !

Tuesday, June 21, 2011

भैंस गई बौराई

सुबह सुबह कल्लन मियाँ का फोने आ लिया की जादव के तमाशा मस्त जम रिया है आ जाओ ड़ोल लेके जल्दी से। हमसे वैसे भी सही से नहीं लगते उल्टे सीधे बटन बुशिर्ट को फंसा निकल लिए। बीबी चिल्ला पडीं चाय रख दी जो गैस पे..हम ने कहा ब्रेअकिंग न्यूज़ है उतार दो। तीन गली के कुत्ते ,दो छिछोरे और कुछ एक कद्रदान आँखों से बचते जादव पहेलवान दूधवाला के पहुच लिए। माजरा क्या है मियाँ , खाट पे पसरे कल्लन से पूछा? एक तो सबेरे सबेर डेन्चर ना लगाने की मुश्किल और हंसते हुए बात करना, मजाल एल लव्ज़ समझ आये। जाने कब सुधरेंगे। क्या हुआ पहलवान से डिरेक्ट पूछ लिया। उसने जले पे नमक ना फेंको वाली लुक दी और बोला सुन के क्या खिल्ली उडवानी हैगी। और बता दिया तो नाडा और ड़ोल दोनों गिर जांगे बजंगी कसम से। हम थोडा तो परेशान हुए पर कल्लन की नॉन स्टॉप हंसी से लगा की मामला कुछ ऐसा वैसा ही होगा, हमने पंगा ले लिया और पहलवान सही था। ड़ोल नाडा दोनों खुल गए, भैंस रानी दूध देने से इंकार कर गयी है, वज़ह सिम्पल है उसे फेसबुक पर अकाउंट चाहिए। जादव ऐसा कैसे..हमने घी घिगातेय पूछा, तभी कोने से सिसकने की आवाज़ आ गई। जादव ने अपने लौंडे को लैपटॉप समेत भूस की कोठरी मैं बाँध रखा था। सारा दिन इसके सामने बैठ के यही करता था, अब आलम यह है की लैपटॉप ना हो तो मजाल दूध दे ले। यू टूब पे विडियो हैं साली के एश्लील से, दूदपिलाते , और ना जाने, ४७४ फ्रेंड लिस्ट, विधयक बनेगी महिला आरक्षण के बाद, आज कल एक चिरैया से भी चर्चा है और यह सब इस हरामखोर की वज़ह से..आज तेरा इंटर नेट निकालूं मैं। वेटनरी शो में ऑनलाइन है, एक कमीना सवा लाख लगा गया, इसके चक्कर में चारा कम्पनी, दूध निकलने वाली मशीन की कम्पनी, सपरेटा कम्पनी सब के एस एम् एस आ रहे हैं। तीन दिन दो जापानी अंग्रेज इसके इधर उधर हाथ लगते रहे, हमसे बता रहे की कैल्सियम दो, अपनी जननी के तीन मैं ना दिया इसको कैल्सियम दूंगा। प्रेस वाले आ जाते है, फेश बुक बफलो। यहाँ कल्लन भाई के घर दस किल्लो का भाभी से वादा है, दुनिया किसी से पहलवान दगा करले पर भाभी से..माँ बराबर है, पांच बार नमाज़ी, आज तक पहले बैठने को मूधा और पीने को पानी ...बाद मैं दूध, और यह हेरोइने है के..आज करूँ तेरा मैं लोग इन... कल्लन मियाँ हंसो मतना, खून पि लिया है ..माँ कसम भाभी का वादा ना होता तो लैपटॉप तोड़ देता सर पे... लाओ मियाँ ड़ोल दो। चल आ॥ आ॥ इसका पासवर्ड खोल..बछडे का नाम है..पहलवान हँसता है, कल्लन को दौरा आ गया है.उसकी हंसी नहीं रूकती.